भ. गी. 10.11
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः ।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥
अनुवाद
केवल उन पर अनुग्रह करने के लिए, मैं उनके चित्त में स्थित होकर, ज्ञान के प्रकाशमान दीपक से अज्ञानजनित अन्धकार का नाश करता हूँ।