भ. गी. 10.35
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥
अनुवाद
सामवेद के सामों में मैं बृहत्साम हूँ; छन्दों में मैं गायत्री हूँ; महीनों में मैं अग्रहायण* हूँ; और ऋतुओं में मैं वसन्त हूँ।
टिप्पणियाँ
* अग्रहायण पारंपरिक भारतीय पंचांग का पहला मास है और सामान्यतः नवंबर–दिसंबर में पड़ता है।