भ. गी. 11.6

पश्यादित्यान्वसून्रुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥

अनुवाद

हे भरतवंशी! [मेरे ऐश्वर्यमय रूप में] बारह आदित्यों, आठ वसुओं, ग्यारह रुद्रों, दोनों अश्विनीकुमारों तथा उनचास मरुतों को देखो। और उन अनेक अद्भुत रूपों को भी देखो, जिन्हें पहले कभी नहीं देखा गया है।

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