भ. गी. 13.19
प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि ।
विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान् ॥
विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसम्भवान् ॥
अनुवाद
यह जानो कि प्रकृति और पुरुष दोनों ही अनादि हैं। यह भी जान लो कि समस्त विकार तथा भौतिक गुणों से उत्पन्न पदार्थ प्रकृति से ही उत्पन्न होते हैं।