भ. गी. 14.18
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः ।
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसाः ॥
अनुवाद
सत्त्व में स्थित लोग ऊपर [उच्च लोकों में] जाते हैं, रजस्-स्वभाव वाले मध्य [पृथ्वी-लोक] में रहते हैं, और तमस्-स्वभाव वाले, जो निम्नतम गुणों से उत्पन्न निकृष्ट आचरण और स्वभाव में फँसे हुए हैं, नीचे [निम्न लोकों में] चले जाते हैं।