भ. गी. 15.8
शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः ।
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् ॥
अनुवाद
[जब] शरीर का स्वामी [जीव] पुराने शरीर को छोड़कर नया शरीर ग्रहण करता है, तब वह इन छह इन्द्रियों को अपने साथ ले जाता है, जैसे वायु सुगन्धित स्रोत से गन्धों को अपने साथ ले जाता है।