भ. गी. 4.31b

नायं लोकोऽस्त्ययज्ञस्य कुतोऽन्यः कुरुसत्तम ॥

अनुवाद

कुरुश्रेष्ठ, जो यज्ञ नहीं करता है वह तो इस तुच्छ सुखों वाले मनुष्यलोक को भी प्राप्त नहीं कर सकता है फिर स्वर्गीय सुख वाले अन्य लोक की तो बात ही क्या है ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, कार (गाड़ी) और मानव शरीर के बीच आहार (ईंधन) की तुलना में क्या मौलिक तात्विक अंतर बतलाया गया है, तथा श्वास की गति और मन की भावनाओं के बीच का व्यावहारिक संबंध क्या समझाया गया है?

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