भ. गी. 6.31

सर्वभूतस्थितं यो मां भजत्येकत्वमास्थितः ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि स योगी मयि वर्तते ॥

अनुवाद

जो योगी एकत्व की दृष्टि में स्थित होकर समस्त प्राणियों में निवास करने वाले मुझको भजता है, वह सभी परिस्थितियों में मुझमें ही स्थित रहता है।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ६.३० ("यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति...") की व्याख्या के अनुसार, सब जगह भगवान को देखने और सब कुछ भगवान में देखने की दिव्य दृष्टि का क्या रहस्य बतलाया गया है, तथा मकड़ी (स्पाइडर) के दृष्टांत से 'निमित्त कारण' और 'उपादान कारण' का क्या तात्विक सिद्धांत समझाया गया है?

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