श्रीभगवानुवाच पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते । न हि कल्याणकृत्कश्चिद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥
अनुवाद
श्रीभगवान् ने कहा—हे पार्थ! ऐसे व्यक्ति का न तो इस जन्म में और न ही अगले जन्म में विनाश होता है, क्योंकि हे मेरे प्रिय! जो परम कल्याण के लिए प्रयत्न करता है, वह कभी दुर्गति प्राप्त नहीं करता है।
भगवद्गीता के श्लोक ६.४० ("पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते...") की व्याख्या के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन के लिए प्रयुक्त 'तात' संबोधन का क्या विशेष महत्व बतलाया गया है, तथा 'विनाश न होने' और 'कल्याणकृत्' का क्या तात्विक रहस्य समझाया गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): व्याख्यान के अनुसार, भगवान ने पूरी गीता में केवल इसी स्थान पर अर्जुन को परम घनिष्ठता व वात्सल्य से 'तात' कहा है । 'विनाशस्तस्य विद्यते' में विनाश न होने का अभिप्राय नश्वर शरीर से नहीं, बल्कि आत्मा व चित्त पर अंकित योग के संस्कारों से है जो कभी नष्ट नहीं होते । साथ ही, 'कल्याणकृत्' पद यह आश्वासन देता है कि जो भी व्यक्ति आध्यात्मिक व शुभ मार्ग पर कदम बढ़ाता है, उसकी कभी दुर्गति (नरक या पतित योनि) नहीं होती ।
विकल्प ख (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि 'तात' प्रेमपूर्ण संबोधन है , भौतिक शरीर तो नश्वर है ही, और 'कल्याणकृत्' में निष्काम व कल्याणकारी मार्ग के साधकों का वर्णन है ।
भगवद्गीता के श्लोक ६.४१ ("प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः...") की व्याख्या के अनुसार, प्रारंभिक अवस्था में योग-भ्रष्ट हुए साधक की क्या गति बतलाई गई है, तथा उसके जन्म हेतु 'शुचीनाम्' और 'श्रीमताम्' (पवित्र और समृद्ध कुल) का क्या विशेष व्यावहारिक व आध्यात्मिक औचित्य समझाया गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): श्लोक ६.४१ के अनुसार, योग से भ्रष्ट हुआ साधक स्वर्गलोक के सुख भोगने के बाद 'शुचीनां श्रीमतां गेहे' जन्म लेता है । वक्ता समझाते हैं कि 'श्रीमताम्' (धनाढ्य घर) में जन्म मिलने से जीविकोपार्जन की विकट चिंता नहीं रहती, जिससे सत्संग व साधना हेतु समय मिलता है। तथा 'शुचीनाम्' (पवित्र/धार्मिक कुल) में जन्म मिलने से उसे बचपन से ही पवित्र संस्कार, शुद्ध अन्न-धन और आध्यात्मिक माहौल प्राप्त होता है ।
विकल्प ख (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि श्लोक में स्पष्ट रूप से पुण्यवानों के लोक और पवित्र व समृद्ध घर में जन्म लेने का वर्णन है।