भ. गी. 8.7
तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च ।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः ॥
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयः ॥
अनुवाद
अतः प्रत्येक क्षण मुझे स्मरण करो और युद्ध करो। मन और बुद्धि को मुझमें समर्पित करके तुम निःसंदेह मुझे ही प्राप्त करोगे।