भ. गी. 9.3

अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप ।
अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि ॥

अनुवाद

हे परंतप! इस परम ज्ञान के पथ में श्रद्धा न रखने वाले लोग मुझे प्राप्त न कर सकने के कारण मृत्यु पर आधारित संसारचक्र के मार्ग पर लौट आते हैं।

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