भ. गी. 1.13

ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥

अनुवाद

इसके पश्चात् अचानक शङ्ख, नगाड़े, छोटे-बड़े ढोल और तुरही बज उठीं। वह शोर कोलाहलपूर्ण था ।

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प्रश्न 1, कुल 2

कठोपनिषद के 'शरीर-रथ' रूपक के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अर्जुन के रथ का सारथी होना और रथ में 'श्वेत घोड़ों' का होना किस गहरे आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है?

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