भ. गी. 1.14

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥

अनुवाद

तब श्वेत घोड़ों से युक्त भव्य रथ पर बैठे श्रीकृष्ण और अर्जुन ने अपने दिव्य शङ्ख बजाए ।

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प्रश्न 1, कुल 2

कठोपनिषद के 'शरीर-रथ' रूपक के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण का अर्जुन के रथ का सारथी होना और रथ में 'श्वेत घोड़ों' का होना किस गहरे आध्यात्मिक सत्य को दर्शाता है?

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