भ. गी. 1.19

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् ।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् ॥

अनुवाद

आकाश और पृथ्वी को गूँजाती हुई उस भयानक ध्वनि ने आपके पुत्रों और समर्थकों के हृदय को विदीर्ण कर दिया।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, शंखनाद की भयानक ध्वनि ने केवल धृतराष्ट्र के पुत्रों और उनकी सेना के हृदय को ही 'विदीर्ण' (भयभीत) क्यों किया, जबकि पांडवों की सेना पर ऐसा कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा?

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