भ. गी. 10.8

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते ।
इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ॥

अनुवाद

मैं ही सबका उद्गम हूँ, और सब कुछ मुझसे ही प्रवर्तित होता है। यह जानकर भक्ति से युक्त बुद्धिमान लोग मेरी उपासना करते हैं।

प्रश्न पूछें

पोस्ट करने के लिए साइन इन करें

अभी कोई प्रश्न नहीं

इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।