भ. गी. 13.22
उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः ।
परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥
परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥
अनुवाद
इस शरीर में एक अन्य पुरुष भी है, जिसे साक्षी, अनुमन्ता, धारक, रक्षक, महेश्वर तथा परमात्मा भी कहा जाता है।