भ. गी. 13.23
य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह ।
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥
सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥
अनुवाद
जो इस प्रकार गुणों सहित पुरुष और प्रकृति को जानता है, वह अपनी वर्तमान जीवन-स्थिति चाहे जैसी भी हो, पुनः जन्म नहीं लेता।