भ. गी. 2.1

सञ्जय उवाच
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् ।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥

अनुवाद

सञ्जय ने कहा – कृपा से आविष्ट, आकुलता एवं आँसुओं से भरी हुई आँखों वाले, विषाद कर रहे अर्जुन को मधुसूदन ने ये वाक्य बोले ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के प्रथम अध्याय के अंतिम श्लोक (१.४६) में अर्जुन द्वारा "तन्मे क्षेमतरं भवेत्" (इससे मेरा कल्याण होगा) कहने के पीछे व्याख्यान में अर्जुन की मानसिकता का क्या सूक्ष्म और गहरा विश्लेषण किया गया है?

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