भ. गी. 2.24

अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च ।
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः ॥

अनुवाद

इसे काटा या जलाया नहीं जा सकता । इसे गीला नहीं किया जा सकता और सुखाया नहीं जा सकता । यह नित्य, सर्वगत, स्थिर, अचल और सनातन है ।

वीडियो व्याख्याएँ देखें

अपनी समझ परखें

प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक २.२३ ("नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि...") के अनुसार, भौतिक अस्त्र-शस्त्र, अग्नि, जल और वायु आत्मा को प्रभावित क्यों नहीं कर सकते, और आत्मा की तुलना रसायन विज्ञान के 'कैटालिस्ट' (उत्प्रेरक) से किस प्रकार की गई है?

प्रश्न पूछें

पोस्ट करने के लिए साइन इन करें

अभी कोई प्रश्न नहीं

इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।