भ. गी. 2.34
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥
अनुवाद
और लोग सदैव तुम्हारी अपकीर्ति की चर्चा करते रहेंगे, और सम्मानित पुरुष के लिये अपकीर्ति मृत्यु से भी निकृष्ट होती है ।
और लोग सदैव तुम्हारी अपकीर्ति की चर्चा करते रहेंगे, और सम्मानित पुरुष के लिये अपकीर्ति मृत्यु से भी निकृष्ट होती है ।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान के अनुसार अपकीर्ति का संबंध पुनर्जन्म रोकने से नहीं है, और पाप का फल इसी जन्म में तुरंत नहीं बल्कि अदृष्ट रूप में बाद में या अगले जन्म में मिलता है।
विकल्प ख (सही): वक्ता बताते हैं कि पाप का फल अदृष्ट है जो बाद में मिलता है, परंतु अपकीर्ति इसी जन्म में प्रत्यक्ष (दृष्ट) भोगनी पड़ती है। सम्मानित पुरुष (celebrity) के लिए अपकीर्ति मृत्यु से भी कष्टदायक है क्योंकि मृत्यु का शारीरिक कष्ट व्यक्ति एक ही बार झेलता है, जबकि अपकीर्ति और निंदा जितनी बार सामने आती है उतनी बार मानसिक पीड़ा देती है।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी महारथी अर्जुन से युद्ध छोड़ने या संन्यास लेने की प्रार्थना नहीं कर रहा था, बल्कि वे उसकी निंदा करने और उसे कायर/तुच्छ समझने के अवसर की प्रतीक्षा में थे।
विकल्प ख (सही): वक्ता स्पष्ट करते हैं कि अर्जुन भले ही सोचे कि वह गुरुजनों के आदर या कुल-रक्षा हेतु युद्ध से हट रहा है, किंतु विपक्षी क्षत्रिय और महारथी (जैसे कर्ण, दुर्योधन) उसके इस भाव को नहीं समझेंगे। वे यही निष्कर्ष निकालेंगे कि अर्जुन शत्रुओं के भय से डरकर भाग गया है।
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