भ. गी. 2.35

भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः ।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ॥

अनुवाद

महारथी लोग यही मानेंगे कि तुम भय के कारण रणभूमि से भाग गये । वास्तव में जो तुम्हें इतना अधिक मान देते थे वे ही तुम्हें तुच्छ समझेंगे ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवद्गीता के श्लोक २.३४ ("अकीर्तिं चापि भूतानि...") में 'पाप' (अदृष्ट फल) और 'अपकीर्ति' (दृष्ट फल) के अंतर तथा सम्मानित व्यक्ति के लिए अपकीर्ति को 'मरणादतिरिच्यते' (मृत्यु से भी निकृष्ट) कहे जाने का क्या कारण बताया गया है?

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