भ. गी. 4.29

अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे ।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः ॥

अनुवाद

जो अन्य साधक प्राणायाम* में रत हैं, वे उर्ध्वगामी और अधोगामी प्राणवायुओं की गति को नियन्त्रित करते हुए उर्ध्वगामी वायु को अधोगामी में तथा अधोगामी वायु को उर्ध्वगामी में अर्पित करते हैं ।

टिप्पणियाँ

* प्राणायाम का अर्थ शरीर में स्थित जीवन-शक्ति (प्राण) का नियमन अथवा विस्तार है। यह श्वास के नियमन द्वारा किया जाता है, क्योंकि श्वास जीवन-शक्ति का प्रमुख वाहक है। एक अविभाज्य प्राण शरीर में पाँच प्रकार से कार्य करता है; इसलिए उसे प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान—इन पाँच रूपों में समझा जाता है।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, कार (गाड़ी) और मानव शरीर के बीच आहार (ईंधन) की तुलना में क्या मौलिक तात्विक अंतर बतलाया गया है, तथा श्वास की गति और मन की भावनाओं के बीच का व्यावहारिक संबंध क्या समझाया गया है?

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