श्रीभगवानुवाच बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन । तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥
अनुवाद
श्रीभगवान् ने उत्तर दिया - हे अर्जुन, तुम्हारे और मेरे अनेक जन्म हो चुके हैं । मुझे वे सब ज्ञात हैं परन्तु हे शत्रुओं को दग्ध करने वाले, तुम उन्हें नहीं जानते ।
भगवद्गीता के श्लोक ४.५ की व्याख्या के अनुसार, जीवात्मा और भगवान श्रीकृष्ण—दोनों के नित्य होने पर भी—उनकी स्मृति में पाए जाने वाले मूलभूत अंतर का मुख्य दार्शनिक कारण क्या समझाया गया है, तथा पूर्व जन्मों की विस्मृति (भूल जाना) को जीव के लिए किस प्रकार हितकारी माना गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): व्याख्यान के अनुसार भगवान और उनके स्वरूप में कोई भेद नहीं है, जबकि जीव का सूक्ष्म शरीर अलग होता है और अविद्या व चंचलता के कारण वह पूर्व जन्मों की स्मृति खो देता है। इसके अतिरिक्त, वक्ता बताते हैं कि पूर्व जन्मों में हुए अन्यायों और प्रियजनों के वियोग की स्मृति यदि बनी रहे तो व्यक्ति अत्यधिक दुखी व विचलित हो जाएगा, अतः विस्मृति जीव के लिए एक प्रकार का वरदान है।
विकल्प ख (गलत): यह कथन असत्य है क्योंकि व्याख्यान में दूसरे अध्याय का संदर्भ देकर स्पष्ट किया गया है कि जीव और ईश्वर दोनों ही अनादि व नित्य हैं; और विस्मृति का उद्देश्य भौतिक भोगों में फँसाना नहीं बल्कि मानसिक शांति देना है।
भगवद्गीता के श्लोक ४.६ ("अजोऽपि सन्नव्ययात्मा...") की व्याख्या के अनुसार, जीव और ईश्वर दोनों के 'अज' (अजन्मा) और 'अव्यय' (विनाशरहित) होने के बावजूद उनके जन्म में क्या तात्विक अंतर बतलाया गया है, तथा भगवान का 'प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय' प्रकट होना क्या दर्शाता है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): वक्ता समझाते हैं कि जीव और ईश्वर दोनों नित्य व अजन्मा हैं, किंतु जीव कर्म-बंधन और बहिरंगा माया के अधीन होकर विवशतापूर्वक जन्म लेता है। इसके विपरीत, भगवान बहिरंगा माया के नियंता हैं और अपनी अंतरंगा शक्ति (प्रकृतिं स्वाम/आत्म-माया) का आश्रय लेकर जीवों पर कृपा करने हेतु अपनी स्वेच्छा से दिव्य रूप में प्रकट होते हैं।
विकल्प ख (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि व्याख्यान में स्पष्ट किया गया है कि जीव का जन्म में कोई व्यक्तिगत चुनाव नहीं होता (वह कर्म-परवश होता है) और भगवान का शरीर त्रिगुणात्मक भौतिक सत्वगुण से नहीं बल्कि विशुद्ध चिन्मय तत्व से बना होता है।