भ. गी. 5.1

अर्जुन उवाच
सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि ।
यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥

अनुवाद

अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण, मुझे कर्म-संन्यास का उपदेश देने के पश्चात् आप पुनः निष्काम कर्मयोग का भी उपदेश दे रहे हैं । कृपया मुझे निश्चयपूर्वक बताएँ कि इन दोनों में से कौन सा सबसे अधिक कल्याणकारी है ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवद्गीता के दूसरे, तीसरे और चौथे अध्याय को सुनने के बाद भी पांचवें अध्याय के प्रारंभ में अर्जुन पुनः 'कर्म संन्यास' और 'कर्मयोग' में से एक निश्चित श्रेयस्कर मार्ग चुनने का प्रश्न क्यों पूछते हैं, तथा एक उत्तम आचार्य (शिक्षक) द्वारा तुरंत सीधा उत्तर न देकर इस प्रकार उपदेश देने का क्या मुख्य उद्देश्य बतलाया गया है?

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