भ. गी. 6.3

आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते ।
योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥

अनुवाद

जो मुनि योग के मार्ग पर आरूढ़ होना चाहता है, उसके लिए कर्म (अर्थात् कर्मयोग) को साधन कहा गया है और विशेषतः जो योगारूढ़ हो चुका है, उसके लिए मन को ध्यान (अर्थात् शम) में स्थिर रखना साधन कहा गया है।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ६.३ ("आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते...") में 'आरुरुक्षु' (साधक) और 'योगारूढ़' (सिद्ध) के लिए क्या भिन्न-भिन्न साधन बतलाए गए हैं, तथा साधक के लिए कर्मयोग का आश्रय लेना क्यों अनिवार्य समझाया गया है?

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