भगवद्गीता के सातवें अध्याय में "वासुदेवः सर्वम्" (वासुदेव ही सब कुछ हैं) इस श्लोक की व्याख्या के अनुसार, ज्ञानी भक्त और अन्य तीन प्रकार के भक्तों में मुख्य अंतर तथा "मिट्टी और घड़े" के दृष्टांत द्वारा क्या तात्विक सिद्धांत समझाया गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि ज्ञानी केवल वासुदेव की शरण लेता है, और मिट्टी का दृष्टांत जगत् के मूल कारण परमात्मा को सिद्ध करता है।
विकल्प ख (सही): व्याख्यान के अनुसार ज्ञानी समझता है कि भगवान वासुदेव के अतिरिक्त कुछ नहीं है, अतः वह अनन्य होकर केवल भगवान की शरण लेता है। मिट्टी का उदाहरण देकर समझाया गया है कि जैसे बर्तन बनने से पूर्व, टूटने के बाद और बीच में भी मूलतः मिट्टी ही होता है, वैसे ही जगत् का मूल कारण और अधिष्ठान भगवान ही हैं।
भगवद्गीता के सातवें अध्याय में "कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः..." श्लोक की व्याख्या के अनुसार, कामनाएँ मनुष्य के विवेक पर कैसे प्रहार करती हैं, तथा मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी के उदाहरण से बुद्धि के दूषित होने की क्या प्रक्रिया समझाई गई है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि कामना विवेक को तीव्र नहीं करती बल्कि ढँक लेती है, और रोगी विवेक के हरण होने पर गलत आचरण करता है।
विकल्प ख (सही): श्लोक की व्याख्या के अनुसार कामना मन में आते ही मनुष्य के विवेक को चुरा लेती है (हृतज्ञानाः)। वक्ता मधुमेह रोगी का उदाहरण देते हैं कि ज्ञान होते हुए भी जब भोग की इच्छा आती है, तो बुद्धि दूषित होकर उस गलत कार्य के पक्ष में ही कुतर्क देने लगती है और मनुष्य अपने स्वभाव व कामना के अधीन हो जाता है।