भ. गी. 7.25

नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः ।
मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥

अनुवाद

दिव्य शक्ति (योगमाया) से आवृत मैं सभी के लिए प्रकट नहीं हूँ। इसलिए यह मोहित संसार मुझ अजन्मा और अविनाशी को नहीं जानता है।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के सातवें अध्याय के चौबीसवें श्लोक ("अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः...") की व्याख्या के अनुसार, अबुद्धि (बुद्धिहीन) मनुष्य भगवान के स्वरूप के विषय में क्या भूल करते हैं, तथा सूर्य और उसकी प्रभा के दृष्टांत से साकार व निराकार का क्या समन्वय समझाया गया है?

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vivekjhagBhagavad Gītā readerClosed — Satisfied

पूछा गया 26 Sep 2026, 16:24

पाठक का प्रश्न

Is Durga/Parvati- the consort of Lord Shiva the personified form of Mahamaya?

  1. व्यवस्थापक का उत्तर

    Yes, she is.