भ. गी. 1.36

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ।
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥

अनुवाद

हे जनार्दन ! धृतराष्ट्र के पुत्रों और अनुयायियों की हत्या कर हमें क्या सुख मिलेगा ? इन अत्याचारियों की हत्या करके हमें केवल पाप लगेगा।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान में भगवान श्री कृष्ण के 'मधुसूदन' नाम की जो पौराणिक और दार्शनिक पृष्ठभूमि बताई गई है, उसके अनुसार मानव मन के वे दो कौन से मुख्य दोष हैं जिन्हें 'मधु' और 'कैटभ' असुरों का रूप माना गया है?

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