भ. गी. 1.44

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥

अनुवाद

हे जनार्दन ! हमने ऐसा पारम्परिक स्रोतों से सुना है कि जिनकी कुल परम्पराएँ नष्ट हो गई हैं वे अनिश्चित काल तक नरक में वास करते हैं ।

वीडियो व्याख्याएँ देखें

अपनी समझ परखें

प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, कुरुक्षेत्र में अर्जुन का विचार और तर्क बदलने के पीछे मानव मन और बुद्धि की कौन सी सूक्ष्म कार्यप्रणाली उजागर होती है, और भक्ति मार्ग में 'अहंकार' के समाधान का क्या वास्तविक स्वरूप बताया गया है?

प्रश्न पूछें

पोस्ट करने के लिए साइन इन करें

अभी कोई प्रश्न नहीं

इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।