भ. गी. 2.10

तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः ॥

अनुवाद

हे भरतवंशी ! तब श्रीकृष्ण ने, मानो मुस्कुराते हुए, दोनों सेनाओं के मध्य विषाद करने वाले अर्जुन से ये वचन कहे ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक २.८ के अनुसार, अर्जुन जब कहता है कि पृथ्वी का निष्कंटक समृद्ध राज्य या देवताओं का स्वामित्व प्राप्त होने पर भी उसकी इंद्रियों को सुखाने वाला शोक दूर नहीं हो सकता, तो व्याख्यान में इसके पीछे क्या गहरा दार्शनिक कारण बताया गया है?

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