भ. गी. 2.9

सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तपः ।
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥

अनुवाद

सञ्जय ने कहा – हृषिकेश से इस प्रकार कहने के पश्चात्, शत्रुओं को ताप देने वाले गुडाकेश ने गोविन्द से कहा, "मैं युद्ध नहीं करूँगा," और चुप हो गये ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक २.८ के अनुसार, अर्जुन जब कहता है कि पृथ्वी का निष्कंटक समृद्ध राज्य या देवताओं का स्वामित्व प्राप्त होने पर भी उसकी इंद्रियों को सुखाने वाला शोक दूर नहीं हो सकता, तो व्याख्यान में इसके पीछे क्या गहरा दार्शनिक कारण बताया गया है?

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