भ. गी. 2.12

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः ।
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् ॥

अनुवाद

ऐसा कोई समय नहीं था जब मेरा, तुम्हारा एवं इनमें से किसी भी राजा का अस्तित्व नहीं था । भविष्य में भी हममें से किसी का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होगा ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान में भगवद्गीता के श्लोक २.११ के आधार पर 'प्रज्ञावाद' (प्रज्ञावादांश्च भाषसे) और 'पंडित' (नानुशोचन्ति पण्डिताः) की क्या दार्शनिक व्याख्या की गई है?

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