भ. गी. 2.16

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः ।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ॥

अनुवाद

असत् का कोई अस्तित्व नहीं है, और सत् का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं होता है । इन दोनों [सिद्धान्तों] का निष्कर्ष तत्त्वदर्शियों द्वारा प्रत्यक्ष अनुभव किया गया है ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवद्गीता के श्लोक २.१५ में 'सुख' और 'दुःख' की शाब्दिक व दार्शनिक व्युत्पत्ति तथा 'व्यथा' (व्यथित करने वाली स्थिति) का क्या गहरा रहस्य समझाया गया है?

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