भ. गी. 2.52
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥
अनुवाद
जब तुम्हारी बुद्धि मोहरुपी दलदल को पार कर जाएगी, तब तुम (वेदों में वर्णित उन लौकिक सुखों) के प्रति उदासीन हो जाओगे जिनके विषय में तुमने पहले सुना है और जिनके विषय में सुनना शेष है ।
जब तुम्हारी बुद्धि मोहरुपी दलदल को पार कर जाएगी, तब तुम (वेदों में वर्णित उन लौकिक सुखों) के प्रति उदासीन हो जाओगे जिनके विषय में तुमने पहले सुना है और जिनके विषय में सुनना शेष है ।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान के अनुसार 'अनामय पद' भौतिक संसार का कोई पद नहीं है। इसके अलावा, फल-त्याग का अर्थ स्वास्थ्य या आनंद को त्यागना नहीं, बल्कि फल से जुड़ी मानसिक आसक्ति का त्याग है।
विकल्प ख (सही): वक्ता समझाते हैं कि संस्कृत में 'आम' का अर्थ रोग या कष्ट होता है; अतः 'अनामय पद' का अर्थ समस्त भौतिक दुखों व विकारों से रहित भगवद्-धाम है। बुद्धिमान (मनीषी) जन कर्मफल के आने पर उसमें आसक्त नहीं होते, बल्कि उसे प्रभु की कृपा मानते हैं।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान में 'कलिल' को अंधकार व दलदल बताया गया है, न कि निर्मल मार्ग। इसके अतिरिक्त मोह छूटने और वैराग्य मिलने के बीच कोई समय का अंतर (विलंब) नहीं होता।
विकल्प ख (सही): वक्ता बताते हैं कि 'कलिल' का शाब्दिक अर्थ दलदल है जहाँ प्रयास करने पर व्यक्ति और अधिक डूबता जाता है। 'यदा' (जब) और 'तदा' (तब) का प्रयोग यह सिद्ध करता है कि जैसे ही बुद्धि मोह से बाहर निकलती है, उसी क्षण (तत्काल) व्यक्ति सुने हुए और सुनने योग्य भोगों से विरक्त (निर्वेद) हो जाता है।
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