भ. गी. 3.21
स यत्प्रमाणंकुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥
अनुवाद
श्रेष्ठ व्यक्ति जो भी कार्य करता है, सामान्य जन उसका अनुकरण करते हैं । ऐसा महान व्यक्ति जो भी आदर्श स्थापित करता है, सामान्य जन उसका अनुसरण करते हैं ।
श्रेष्ठ व्यक्ति जो भी कार्य करता है, सामान्य जन उसका अनुकरण करते हैं । ऐसा महान व्यक्ति जो भी आदर्श स्थापित करता है, सामान्य जन उसका अनुसरण करते हैं ।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान में स्पष्ट कहा गया है कि केवल धन या पद से कोई श्रेष्ठ नहीं बनता और बिना आचरण के केवल प्रचार करना शास्त्र का सार नहीं है।
विकल्प ख (सही): व्याख्यान के अनुसार 'श्रेष्ठ' शब्द 'प्रशस्य' (जिसके चरित्र और गुणों की स्वतः प्रशंसा करने की इच्छा हो) से बनता है। इसके साथ ही वक्ता स्पष्ट करते हैं कि शास्त्र का मूल सार केवल 'प्रचार' नहीं बल्कि 'आचार' (आचरण) है। प्रचार करने से पहले शास्त्र का अध्ययन करना और उस पर स्वयं आचरण करना अनिवार्य है।
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (गलत): व्याख्यान के अनुसार भगवान के लिए तीनों लोकों में कुछ भी अप्राप्त नहीं है और न ही वे किसी स्वार्थ के लिए कर्म करते हैं।
विकल्प ख (सही): वक्ता बताते हैं कि भगवान आप्तकाम हैं, उन्हें किसी वस्तु की कामना नहीं है। वे केवल परोपकार, साधुओं की रक्षा और लोकसंग्रह के लिए स्वयं निष्काम भाव से कर्म में प्रवृत्त रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण महाभारत युद्ध के मैदान में त्रिलोकीनाथ होकर भी अर्जुन के रथ के सारथी का दायित्व निभाना है।
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