भ. गी. 3.21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणंकुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥

अनुवाद

श्रेष्ठ व्यक्ति जो भी कार्य करता है, सामान्य जन उसका अनुकरण करते हैं । ऐसा महान व्यक्ति जो भी आदर्श स्थापित करता है, सामान्य जन उसका अनुसरण करते हैं ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ३.२१ ("यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः...") की व्याख्या के अनुसार, 'श्रेष्ठ' शब्द की व्युत्पत्ति तथा शास्त्र का वास्तविक सार क्या समझाया गया है?

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