भ. गी. 3.23

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥

अनुवाद

हे अर्जुन ! यदि मैं कभी भी सतर्कतापूर्वक क्रियाशील होना छोड़ दूँ, तो निश्चय ही सभी मनुष्य प्रत्येक विषय में मेरे पदचिन्हों का अनुसरण करेंगे ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवद्गीता के श्लोक में प्रयुक्त 'अतन्द्रितः' शब्द का क्या सूक्ष्म अर्थ समझाया गया है, तथा यदि भगवान कर्म न करें तो समाज पर उसका क्या दुष्परिणाम होगा?

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