भ. गी. 3.24

उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्यां कर्म चेदहम् ।
सङ्करस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥

अनुवाद

यदि मैं कर्म न करूँ तो ये सभी लोक नष्ट हो जाएँगे और मैं समाज के वर्गों और उनके कर्तव्यों में व्यवधान का कारण बन जाऊँगा । इस प्रकार मैं इन लोगों के विनाश के लिए उत्तरदायी हो जाऊँगा ।

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प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, भगवद्गीता के श्लोक में प्रयुक्त 'अतन्द्रितः' शब्द का क्या सूक्ष्म अर्थ समझाया गया है, तथा यदि भगवान कर्म न करें तो समाज पर उसका क्या दुष्परिणाम होगा?

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