भ. गी. 4.15

एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः ।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥

अनुवाद

ऐसा जानकर प्राचीनकाल के मोक्षकामी भी कर्म में भाग लेते थे । अतः तुम भी पूर्वकाल में पूर्वजों द्वारा किये गये कर्मों को करो ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ४.१४ की व्याख्या के अनुसार, स्वाभाविक श्वास-प्रश्वास जैसी 'क्रिया' और बंधन पैदा करने वाले 'कर्म' में क्या सूक्ष्म अंतर बताया गया है, तथा कर्म के फल से व्यक्ति क्यों और कैसे बंधता है?

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