भ. गी. 4.16

किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः ।
तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥

अनुवाद

कर्म क्या है और अकर्म क्या है ? इस विषय में तो ज्ञानी भी भ्रमित हो जाते हैं । अब मैं तुम्हें कर्म का सत्य समझाऊँगा जिसे जानकर तुम कर्म के बन्धन से मुक्त हो जाओगे ।

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अपनी समझ परखें

प्रश्न 1, कुल 2

व्याख्यान के अनुसार, 'कर्म' और 'क्रिया' में क्या मूलभूत अंतर समझाया गया है, तथा कर्म के नियम केवल मनुष्य जाति पर ही विशेष रूप से क्यों लागू होते हैं, पशु-पक्षियों पर क्यों नहीं?

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