भ. गी. 5.17

तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः ।
गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥

अनुवाद

जिनकी बुद्धि उन (परमेश्वर) में स्थिर है, जिनका मन उनके ध्यान में लीन है, जिन्की उनमें निष्ठा है, जो उनके परायण हैं, तथा जिनके पाप (परमेश्वर के) साक्षात्कार से नष्ट हो गए हैं, वे उस गन्तव्य को प्राप्त करते हैं जहाँ से कोई लौटता नहीं ।

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प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ५.१७ ("तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः...") की व्याख्या के अनुसार, श्लोक में प्रयुक्त 'तद्बुद्धयः', 'तदात्मानः', 'तन्निष्ठाः' और 'तत्परायणाः'—इन चार पदों का वास्तविक सार क्या बतलाया गया है, तथा देवराज इंद्र और पारिजात वृक्ष के प्रसंग से क्या आध्यात्मिक रहस्य स्पष्ट किया गया है? विकल्प:

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