भ. गी. 6.18

यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते ।
निस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा ॥

अनुवाद

जब अनुशासित मन केवल आत्मा में ही स्थिर हो जाता है और मनुष्य सभी प्रकार के इन्द्रिय-भोग की आकांक्षा से मुक्त हो जाता है, तब वह युक्त कहलाता है – अर्थात् वह योग में दृढ़तापूर्वक स्थित होता है।

वीडियो व्याख्याएँ देखें

अपनी समझ परखें

प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के श्लोक ६.१८ ("यदा विनियतं चित्तम्...") की व्याख्या के अनुसार, पतंजलि योगसूत्र के व्यास-भाष्य में वर्णित चित्त की ५ अवस्थाओं में से कौन-सी अवस्थाएँ समाधि/ध्यान हेतु उपयुक्त हैं, तथा श्लोक के किन पदों का संबंध 'अभ्यास' और 'वैराग्य' से बतलाया गया है?

प्रश्न पूछें

पोस्ट करने के लिए साइन इन करें

अभी कोई प्रश्न नहीं

इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।