जिस व्यक्ति का हृदय ज्ञान और प्रत्यक्ष अनुभूति द्वारा सन्तुष्ट है, जो प्रत्येक परिस्थिति में स्थिर रहता है, जिसकी इन्द्रियाँ नियन्त्रित हैं, और जो मिट्टी के ढेले, पत्थर एवं स्वर्ण के टुकड़े को समान दृष्टि से देखता है – ऐसा योग द्वारा परमात्मा से युक्त व्यक्ति योगी कहलाता है।
टिप्पणियाँ
* युक्त शब्द का अर्थ जुड़ा हुआ, युक्त, संपन्न, संयमित, संतुलित आदि हो सकता है। यह √युज् धातु से बना है, जिसका अर्थ “जोड़ना” है; योग शब्द भी इसी धातु से बना है।
भगवद्गीता के श्लोक ६.७ ("जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः...") की व्याख्या के अनुसार, सुख और दुख तथा मान और अपमान के संदर्भ में 'मन को समता में रखने' का क्या सूक्ष्म आध्यात्मिक नियम और व्यावहारिक दृष्टिकोण समझाया गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): वक्ता बतलाते हैं कि सुख का भोग ही दुख से व्याकुल होने का मुख्य कारण/बीज है, क्योंकि सुख-दुख और मान-अपमान सिक्के के दो पहलुओं की भाँति अनिवार्य रूप से साथ आते हैं। इसलिए साधक को सुख और प्रशंसा में भी उद्वेग-रहित रहना चाहिए तथा निंदा करने वाले व्यक्ति को अपने पूर्व-कर्म का फल देकर चित्त-शुद्धि में सहायक मानकर धन्यवाद देना चाहिए।
विकल्प ख (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि केवल दुख में मन को संभालने का प्रयास सफल नहीं होता यदि सुख का उपभोग करके दुख का बीज बोया गया हो, और बदला लेना मन में अशांति व कर्म-बंधन पैदा करता है।
भगवद्गीता के श्लोक ६.८ ("ज्ञानविज्ञानतृप्तात्मा कूटस्थो विजितेन्द्रियः...") की व्याख्या के अनुसार, 'ज्ञान और विज्ञान' का क्या अंतर बतलाया गया है, तथा सिद्ध योगी के लिए 'कूटस्थ' एवं 'समलोष्टाश्मकांचनः' पदों का क्या तात्विक अर्थ समझाया गया है?
आपका उत्तर सही है।
आपका उत्तर गलत है।
विकल्प क (सही): वक्ता स्पष्ट करते हैं कि शास्त्र-ज्ञान 'ज्ञान' है और भगवद्-तत्त्व की प्रत्यक्ष अनुभूति 'विज्ञान' है, जिससे आत्मा सदा के लिए तृप्त हो जाती है। जिस प्रकार लोहार का ऐनहाड़ा (कूट) भारी चोट पड़ने पर भी स्थिर और निर्विकार रहता है, उसी प्रकार सिद्ध योगी 'कूटस्थ' होकर निर्विकार रहता है। तथा मिट्टी, पत्थर और सोने को समान दृष्टि से देखने का अर्थ उनके उपयोग को जानते हुए भी लाभ-हानि में सम व असंपृक्त रहना है।
विकल्प ख (गलत): यह व्याख्या असत्य है क्योंकि यहाँ ज्ञान-विज्ञान का संबंध अध्यात्मज्ञान व आत्म-अनुभूति से है, न कि कूटनीति या सोने को मिट्टी में दबाने से।