भ. गी. 7.4

भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च ।
अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥

अनुवाद

मेरी भौतिक शक्ति (प्रकृति) पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि एवं अहंकार के रूप में आठ भागों में विभक्त है।

वीडियो व्याख्याएँ देखें

अपनी समझ परखें

प्रश्न 1, कुल 2

भगवद्गीता के सातवें अध्याय के तीसरे श्लोक की व्याख्या के अनुसार, मनुष्य शब्द की 'मनसा सीवति इति मनुष्यः' व्युत्पत्ति का क्या सूक्ष्म अर्थ समझाया गया है, तथा सहस्रों मनुष्यों में से किसी एक के ही अध्यात्म की ओर प्रवृत्त होने का क्या मुख्य मनोवैज्ञानिक व व्यावहारिक कारण बतलाया गया है?

प्रश्न पूछें

पोस्ट करने के लिए साइन इन करें

अभी कोई प्रश्न नहीं

इस श्लोक पर पहला प्रश्न पूछें।